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Monday, October 12, 2015

Pyaar (Love)


'तैनूं पता वी है प्यार की हुंदा है?'
नही..... ओह डौर भौर उस वल्ल देखण लग पई।
ओह हैरान होया। आपणी पत्नी दीयाँ अक्खाँ िवचली मोह दी तंद उस लई काफ़ी नहीं सी। ओह कुछ होर वी चाहुंदा सी।
उसदी मसूिमयत पति दीयाँ सवाल भरीयाँ नज़रां च जवाब तलाषण लग्गी। उस तक्किया, इक परत खिझ, इक परत ग़ुस्सा,़ इक परत प्यार, इक परत सोच..... पल भर विच्च किन्ने ही रंग एहना अक्खाँ विच्च दी लँघ गये। पर होठाँ दी मुस्कुराहट नहीं हिल्ली!
ओह कुझ न समझ पाई। छू के पढ़न दी कोशिश कीती। आपणे नरम पोटियाँ हेठ उसदा सख़्त मत्था उसनू नदी दे सीने कंकड़ वांग चुभिया। िमट्ठी जिही पीड़ नाल पलकां झुका दंदां हेठ थल्लड़ला बुल्ल नप्प ओह मुस्कुरा पई। पता नहीं की कहिणा हुण इसने? जानण लई प्यार नाल उसदे चिहरे वल्लy तक्कण लग्गी।
'प्यार क़ुरबानी है!' मध्धम जिही अवाज़ विच उस गंभीरता नाल किहा। ..... ते ओह ठहाका मारके ताज़ा खिड़े फुल्ल वाँगू हस्स पई।
डौर भौर होण दी वारी हुण उसदी सी।


साहर