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Monday, October 12, 2015

Khaure Ambreen Ki Hoeya....


इक हालों बेहाल दिल रोएया
ख़ौरे अम्बरीं की होएया
सागर दी अक्ख िवच हँझू
िसम िसम ज़खम बंद होएया

टुट्टदे तारे तों जद मन्नत मंगी
धरती दा सीना जल मोएया

पित्तयाँ दे परां नूं पेचे
रुक्ख बेचारा खूँ होएया

शेर दे पंजे कंडा चुिभया
जंगल सारा कंपन होएया

माँ दे दुद्ध िवच ज़हर जो आई
माँ वी मोई, बच्चा मोएया़ ....!


़़़साहर
12/12/12